सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

जून, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नक्षत्र - फल

                                                             नक्षत्र-- फल 1  अश्विनी नक्षत्र - अश्विनी , नक्षत्र देवता - अश्विनीकुमार , नक्षत्र स्वामी - केतु  ,  नक्षत्र  पूज्य वृक्ष - वत्सनाग  ,नक्षत्र ऐच्छिक  वृक्ष - अडोसा ( अडूसा ) , नक्षत्र चरणाक्षर - चु, चे, चो, ला ४ चरण मेष राशी में  , नक्षत्र प्राणी- घोडा नक्षत्र तत्व -  वायु , नक्षत्र गण- देव ,  नक्षत्र स्वभाव – मृदु. अश्विनी नक्षत्र में जन्म हुए मनुष्य के गुण:- अलंकार प्रेमी , सुंदर,  मनोहर -जिनको देखनेसे मन प्रसन्न हो, समर्थ, और बुद्धिमान होते हैअश्विनी से जुड़े व्यवसाय:-  प्रेरक प्रशिक्षक,  अभियान प्रबंधक,  एथलीट, खेल से संबंधित व्यवसाय, हवाई जहाज/ ऑटो / नाव / घोड़ा दौड़ी , सैन्य, कानून  प्रवर्तन, इंजीनियरिंग, जौहरी, चिकित्सा व्यवसाय, फार्मासिस्ट,  सलाहकार , औषधि माहिर, शारीरिक रूप से  साहसी क्षेत...

आठवें घर में विभिन्न ग्रहों के कारण होने वाले रोग

              आठवें घर में विभिन्न ग्रहों के कारण होने वाले रोग सूर्य आठवें भाव में तेज बुखार, नेत्र दृष्टि दोष, मूत्र पथ के संक्रमण का कारण बनता है। धड़कन और माइग्रेन अष्टम भाव में सूर्य स्वास्थ्य के लिए बिल्कुल भी वांछनीय नहीं है। चन्द्रमा अष्टम भाव में आठवें घर में, चंद्रमा मानसिक तनाव का कारण बनता है,क्योंकि वह मानस पर शासन करता है (मनो मथारो शीतलाश्मी)। आम तौर पर अच्छे स्वास्थ्य के लिए अनुकूल नहीं, लूना दस्त का कारण बन सकता है। मंगल आठवें भाव में ट्यूमर, फोड़ा, दुर्घटना, ऑपरेशन सब मंगल के कारण होता है। वह सर्जरी का ग्रह है। चन्द्र के साथ युति होने पर मानसिक विपथन भी होता है। आठवां मंगल जातक को अति कामुक बनाता है। उत्तरी नोड - छाले इसी छाया ग्रह के कारण होते हैं। आठवां राहु अत्यधिक मानसिक तनाव पैदा कर सकता है, क्योंकि वह मानसिक शांति को सर्वोच्च शासन करने की अनुमति नहीं देगा। महिलाओं के लिए, वह असंगति पैदा करेगा जीवनसाथी के साथ मनमुटाव और कभी-कभी विधवापन। गुरु आठवें भाव में - हालांकि वह मृत्यु के घर में सबसे कम हानिकारक ग्रह है...

2023 Shani Vakri 17 जून राशि के अनुसार कैसा रहेगा परिवर्तन

                                                                     राशि के अनुसार कैसा रहेगा परिवर्तन   १.मेष  राशि से एकादश लाभ भाव में गोचर करते हुए वक्री शनिदेव आय के साधन तो बढ़ाएंगे ही कार्यक्षेत्र का विस्तार भी करेंगे। नए लोगों से मेलजोल बढ़ेगा। उच्चाधिकारियों से संबंध मजबूत होंगे किंतु परिवार के वरिष्ठ सदस्यों तथा बड़े भाइयों से मत भिन्नता रहेगी। संतान संबंधी चिंता परेशान कर सकती है। प्रेम संबंधी मामलों में भी उदासीनता रहेगी। प्रतियोगी छात्रों कोपरीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए और प्रयास करने होंगे। २.वृषभ  राशि से दशम कर्म भाव में गोचर करते हुए वक्री शनि कार्यक्षेत्र का विस्तार तो करेंगे किंतु अति व्यस्तता के कारण शारीरिक थकान का सामना भी करना पड़ेगा। माता-पिता के स्वास्थ्य के प्रति चिंतनशील रहें। योजनाओं को गोपनीय रखते हुए कार्य करेंगे तो अधिक सफल रहेंगे। किसी कारणवश कार्य संपन्न होने...