12/02/2023

राहु की महादशा में राहु की अन्तर्दशा का फल

         

                        राहु


        राहु की महादशा में राहु की अन्तर्दशा का फल

विष और जल के कारण रोग हो । जातक को सर्प का दशन हो । दूसरे आदमी की स्त्री से संयोग हो ।अपने किसी इष्टजन का वियोग हो । जातक कड़ी बोली बोले । और उसे दुष्टजनों के कारण रुष्ट हो 

              राहु की महादशा में बृहस्पति की अन्तर्दशा का फल

सुख की प्राप्ति हो, देवताओं, ब्राह्मणों का पूजन हो, शरीर में कोई न रहे और सुन्दर नेत्र वाली स्त्रियों से समागम हो । विद्वत्ता के विचार-विनिमय और धार्मिक शास्त्रार्थ में समय व्यतीत हो

              राहु की महादशा में शनि की अन्तर्दशा का फल

अपनी स्त्री, पुत्रों और भाईयों से झगड़ा हो । जातक की पदच्युति हो और उसके नौकरों का नाश हो । 

शरीर में चोट लगे तथा बात और पित्त के कारण रोग हो । 

              राहु की महादशा में बुध की अन्तर्दशा का फल

बुध  की  अन्तर्दशा में धन और पुत्र की प्राप्ति   समागम हो, मन में प्रसन्नता हो जातक चातुर्य से कार्य करे । भूषण तथा कुश- धन और पुत्र की प्राप्ति हो, मित्रों से समागम हो, मनएक टीकाकार ने यह भी अर्थ किया है कि मन हो-पर अन्य शुभ में 'तुच्छता फलों का विचार करते हुए यह अर्थ नहीं जंचता ।लता प्राप्त हो संक्षेप में यह है कि राहु और बुध मित्र हैं और बुध से क्रिया कुशलता, चतुरता व्यापार आदि का विचार किया जाता है। इस कारण राहु की महादशा में बुध की अन्तर्दशा में बुध से सम्बन्धित कार्यों में शुभता और वृद्धि लाती है  पर विपत्ति की हानि ।


                     राहु की महदशा में शुक्र की अन्तर्दशा का फल

स्त्री की प्राप्ति हो स्त्री सहवास का सुख हो। हाथी, घोड़े और ज़मीन की प्राप्ति हो या इनका उपभोग प्राप्त हो ।किन्तु अपने आदमियों से विरोध हो और जातक को वात और कफ के कारण रोग हो ।


              राहु की महादशा में सूर्य के अन्तर का फल

शत्रु से पीड़ा हो, अनेक आपत्तियां आवें; विष और अग्नि से पीड़ा हो । शस्त्र से चोट लगे ।और जातक के नेत्रों को अति पीड़ा हो। जातक को राजा या सरकार महान् भय उपस्थित हो और उसकी स्त्री तथा पुत्र को भी कष्ट हो । राहु और सूर्य शत्रु हैं। इस कारण यह अन्तर्दशा इतना अशुभ प्रभाव दिखाती है। 



           राहु की महादशा में केतु की अन्तर्दशा का फल

इस अन्तर्दशा में अशुभ फल होता है ज्वर, अग्नि, शस्त्र और शत्रुओं से भय हो, सिर में रोग हो,शरीर में कम्प हो, जातक को विष और व्रण के कारण कष्ट हो मित्रों से कलह हो और जातक के मित्रों और गुरु जनों को व्यथा हो ।

      राहु की महादशा में मंगल की अन्तर्दशा का फल


राजा, अग्नि, चोर और अस्त्र से भय हो या तो जातक का शरीर नाश हो जाये या मानस रोग हो । नेत्रों को पीड़ा हो, हृदय रोग (Heart trouble) हो और जातक अपने पद से भ्रष्ट हो जाये वर्षात् स्थान हानि का भय हो ।









































































































































































 

10/02/2023

अष्टकवर्ग की गणना


 

                                                                          अष्टकवर्ग चार्ट 


अंक के परिणाम 


14-अंक – कष्टकारी और मृत्युभय देने वाले


15- अंक - सरकार से भय रहने की संभावना बनती


16 अंक – दुर्भाग्य


17- अंक - बीमारी अथवा स्थान की हानि


18- अंक - धन हानि


19 अंक- सगे संबंधियों से लड़ाई-झगडे की संभावन


20- अंक - व्यय अधिक होगा और जातक कुकर्मों में


21- अंक - बीमारी अथवा धन की हानि


22- अंक - स्मरण व विवेक शक्ति की हानि, कमजोरी


23- अंक मानसिक चिन्ताएँ, कष्ट और हानि


24- अंक अचानक हानि अथवा अतिव्ययता से धनहानि


25- अंक- दुर्भाग्य


26- अंक - परेशानियाँ, शिथिलता, स्वभाव में अस्थिरता


27- अंक- व्यय अधिक, व्याकुलता, अस्पष्ट विचार और दुविधाजनक मस्तिष्क


28- अंक - धन लाभ लेकिन संतोषजनक नहीं


29 -अंक- व्यक्ति सम्मान पाता है.


30- अंक- यश, कीर्ति व सम्मान मिले


31 से 33 अंक प्रयास अच्छे व मान-सम्मान की प्राप्ति


36 से 40 अंक व्यक्ति सभी प्रकार की भौतिक सुख-समृद्धि पाता है


41 -अंक - उत्तम धन संपत्ति और अन्य कई स्तोत्रो से आय


42- अंक - भौतिक सुख, धार्मिक, धनवान, प्रेम व सम्मान की जातक को प्राप्ति हो


43- अंक - धन संपत्ति और खुशी मिलें


44 - 45 अंक - एक से अधिक स्तोत्रो से धनलाभ, मान-सम्मान


46 - 47 अंक व्यक्ति सभी गुणो तथा सुखो से युक्त, पवित्र व श्रेष्ठ कार्य करे 


जन्म कुण्डली में अष्टकवर्ग बहुत महत्व रखता है. इसमें दिए बिन्दुओं द्वारा बहुत सी बातों का विश्लेषण किया जा सकता हैकि जीवन का कौन सा भाग शुभ फल देने वाला होगा

ओर कोन सा भाग अशुभ फल देने वाला होगा. इसके अतिरिक्त अष्टकवर्ग द्वारा व्यक्ति विशेष की जन्म कुंडली में राजयोग भी देखे जा सकते है 

04/02/2023

मंगल की महादशा का फल



            
 मंगल की महादशा में मंगल की अन्तर्दशा का फल 

गर्मी से उत्त्पन होने वाले रोग हो घाव होने या चोट लगने का भय हो भाईयो से वियोग हो जाति लोगो से भय हो अग्नि पीड़ा का भय हो | किन्तु जातक को खेत और मुकदमो से धन  प्राप्ति  हो | यदि मंगल योग कारक हो तो उसकी दशा अच्छी हो जाती है | मंगल बलवान होने से जातक के विरोधी उत्त्पन्न होए पर भी विजयी जातक की होती है किन्तु माँगा बिगड़ा हुवा है तो जातक को शत्रुओ से पीड़ा पहुँचती है | 



                  मंगल की महादशा में राहु का फल 

शास्त्र अग्नि चोर ,रिपु राजा इन सब से भय हो | विष के कारण बीमारी या कष्ट हो किसी गुरुजन या बंधू की हानि हो जातक के आँख ,कान और सिर में बीमारी हो | जातक की मृत्यु होये या उस पर महँ अप्पति आवे | 

                मंगल की महादशा में बृहस्पति का फल 


इस अन्तर्दशा शुभ फल मिलते है |  अशुभ फल तो इतना ही है की कान में पीड़ा और कफ के कारण शरीर में रोग हो बाकि सुब शुभ फल ही है | जातक के पुत्र और मित्र में वृद्धि हो | देवताओ की अर्चना हो ,सदैव अतिथि पूजा का अवसर मिले, पुण्य कामो में जातक लगा रहे और तीर्थ में यात्रा हो | 


                  मंगल की महादशा में शनि का फल

यह समय बहुत कष्ट कारक होता है |  जातक के पुत्र एवं गुरुजन और पुरखो पर एक के बाद एक बिप्पति आती है जातक स्वयं विपप्ति का शिकार होता है | शतु स्वयं जातक का धन हर लेते है | अग्नि और वायु से भय हो पित्त और वात के प्रकोप के कारण जातक को शारीरिक रोग हो जातक का धन शत्रु हर ले जातक को मन के भीतर ही भीतर दुःख पहुंचने वाली घटनाये घटित हो 


                   मंगल की महादशा में बुध का फल

राजा या सरकार से भय हो | किसी उक्त  जाती के बैरी के कारण बहुत कष्ट हो | शत्रु से भय हो और धन हानि हो | शत्रु से समागम हो  | असीमित नुकसान उठाना पड़े जातक को कहने का मतलब यह है की ख़राब फल की प्राप्ति होती है | 


            मंगल की महादशा में केतु का फल 

अकस्मात् वज्र से भय हो, अग्नि और शस्त्र से पीड़ा हो, अपने देश से जाना पड़ या धन नाश हो और या तो जातक के
 स्वयं के प्राण छूट जायें या उसकी स्त्री का नाश हो जाये


                 मंगल की महादशा में शुक्र  का फल

 युद्ध में पराजय, अपना स्वदेश छोड़ना पड़ और विदेश में जाकरचोर लोग धन चुरा कर ले जायें, बाँये नेत्र में कष्ट हो। नौकरों की हानि हो ।अर्थात् जातक को नौकरों को कष्ट हो या नौकरों की रहे।संख्या में कमी हो जाये ।


            मंगल की महादशा में सूर्य का फल 

मंगल की महादशा में सूर्य की अन्तर्दशा का फल : राजा से सम्मान प्राप्त हो ।युद्ध के कारण जातक के प्रभाव में वृद्धि; जातक के नौकरों में, घन में, धान्य में लक्ष्मी में और उसकी स्त्रियों में वृद्धि और विलास हो अर्थात् इन सब वस्तुओं का अधिकाधिक वैभव और विलास हो जातक अपने साहस से लक्ष्मी का उपार्जन करे ।


            मंगल की महादशा में चन्द्रमा फल 

नाना प्रकार के घनों का आगम हो पुत्र प्राप्ति हो, वस्त्र. शय्या, आभूषण, रत्न और सम्पत्ति मिले। 
शत्रुओं से जुदाई हो अर्थात् शत्रु पीड़ा न रहे लेकिन किसी गुरुजन को पीड़ा हो और जातक को स्वयं को 
भी गुल्म और पित्त के कारण कष्ट हो सकत है । 



नक्षत्र - फल

                                                             नक्षत्र-- फल 1  अश्विनी नक्षत्र - अश्विनी , नक्षत्र देवता - अश्विनीकुमार , नक्ष...