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सूर्य के प्रभावों का विवरण

                                                                                   सूर्य  लाल किताब का दूसरा अध्याय, जिसे ज्योतिष की वंडर बुक कहा जाता है, सूर्य के प्रभावों का विवरण देता हैउपचार के साथ विभिन्न घरों में। लाल किताब के लेखक द्वारा सूर्य की स्तुति की गईप्रस्तुति के स्वामी विष्णु हमारे सौरमंडल के जनक हैं, जिसके चारों ओर सभी ग्रह परिक्रमा करते हैं।आकाश में प्रकाश की शक्ति, पृथ्वी का तापमान, प्रस्तुति और प्रगति की शक्तिसूर्य द्वारा दर्शाए जाते हैं। उनकी उपस्थिति का अर्थ है "दिन" और अनुपस्थिति का अर्थ है "रात"।मानव शरीर में आत्मा और दूसरों को शारीरिक सेवा प्रदान करने की शक्ति का भी उल्लेख किया गया हैसूर्य के लिए - शक्ति, अधिकार और वित्त का एक शाही ग्रह। यदि सूर्य में रखा जाए तो अच्छे परिणाम प्रदान करता है1 से 5,8,9,11 और 12 भाव। 6, 7 और 10 भाव सूर्य के लिए अशुभ भाव ह...

लाल किताब के उपाय - सफलता के लिए

                             लाल किताब के उपाय - सफलता के लिए प्रत्येक ग्रह के लिए लक किताब (लाल किताब) के उपाय नीचे दिए गए हैं। ये उपाय (उपाय), उपाय और टोटके केवल तभी किए जाने चाहिए जब संबंधित ग्रह या तो जन्मकुंडली में (खराब परिणाम दे रहा हो खराब हो या लाल किताब वर्षकुंडली (वार्षिक चार्ट) में। इसके दुष्प्रभाव को कम करने के लिए यहां दिए गए उपाय कारगर हैं ग्रह लेकिन लाल किताब के लेखक के अनुसार यदि कोई ग्रह अपने घर (पक्के घर) में हो तो अच्छा है या खराब परिणाम बदले नहीं जा सकते। दूसरे शब्दों में, ऐसे मामलों में उपाय कारगर नहीं होंगे। करने के सभी उपाय हैंसूर्य उदय से सूर्यास्त तक किया जाता है। सभी उपाय (उपाय) एक बार में या एक ही दिन में न करें। (सूर्य के लिए उपाय) 1- कोई भी जरूरी काम मीठा खाकर और फिर पानी पीकर शुरू करें. 2- दान में कुछ भी स्वीकार न करें. 3- भगवान विष्णु की पूजा करें। 4- किसी नदी के बहते जल में तांबे का सिक्का प्रवाहित करें। 5- वैवाहिक कलह या झगड़ा हो तो कच्चे ...

बृहस्पति

  अपना घर : 9 सर्वश्रेष्ठ भाव: 1, 5, 8, 9, 12 कमजोर भाव : 6, 7, 10 रंग: पीला (तेज) शत्रु ग्रह : शुक्र, बुध मित्र ग्रह : सूर्य, मंगल, चंद्र तटस्थ ग्रह: राहु, केतु, शनि कार्य: शिक्षा से संबंधित उत्कर्ष : 4 दुर्बल : 10 रोग : दमा समय: सूर्योदय प्रातः 8 बजे से दिन: गुरुवार स्थानापन्न : सूर्य + बुध इस ग्रह को सभी ग्रहों के गुरु के रूप में जाना जाता है और इसे भगवान ब्रह्मा के प्रतीक के रूप में भी माना जाता  है।इसलिए इसे संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी के रूप में जाना जाता है। पीपल, पीला रंग, सोना, पीतल, हल्दी, पीली मिर्च, चने की दाल, पीले फूल, केसर, शेर, मुर्गा, गरुड़, मेंढक, हवाबाज़, शिक्षक, पिता, वरिष्ठ पुजारी, सम्मान, प्रसिद्धि, शिक्षा, भगवान की पूजा है। बृहस्पति का प्रतीक। जब यह ग्रह मंगल, चंद्रमा आदि मित्रों के साथ होता है तो बृहस्पति अधिक शक्तिशाली होता है और बेहतर परिणाम देता है। गुरु : प्रभाव और उपाय बृहस्पति एक उग्र, कुलीन, परोपकारी, पुरुषोचित, विशाल, आशावादी, सकारात्मक और प्रतिष्ठित ग्रह है।  उच्च तर्क क्षमता और सही निर्णय की शक्ति के साथ-साथ मन और आत्मा के उच्च गुण, उदारत...

साढ़े साती

                                                                                                                                                                                     साढ़े साती शनि के गोचर और प्रभाव को अक्सर भय और आशंका के साथ देखा जाता है।  शनि सौर मंडल के सबसे धीमे ग्रहों में से एक है, जिसका प्रभाव वैदिक ज्योतिष प्रणाली के तहत माना जाता है। शनि देने वाला और लेने वाला दोनों है। चूँकि इसका प्रभाव बहुत धीमा और शक्तिशाली होता है,  इसलिए लोग शनि के लाभ से अधिक कष्टों को याद रखते हैं। साढ़े - सती एक हिंदी शब्द है, जिसका...

बृहस्पति की महादशा का फल

                                                                    बृहस्पति की फोटो                                बृहस्पति की महादशा में बृहस्पत्ति की अन्तर्दशा का फल सौभाग्य की वृद्धि हो, कान्ति बढ़े, सब ओर से मान-सम्मान मिले, प्राप्ति हो,  जातक के गुणों का उदय और राजदरबार में इज्जत हो । आचार्य और साधु-जनों से संयोग हो । मन की आकांक्षायें पुत्र पूर्ण हों ।                                   बृहस्पति की महादशा में शनि की अन्तर्दशा का फल  वेश्याओं की संगति हो, शराब पीना आदि दोषों की वृद्धि हो,  सांसा- रिक स्थिति में उन्नति हो, सुख प्राप्ति हो, किन्तु जातक के कुटुम्ब और पशुओं को पीड़ा हो।  धन बहुत अधिक खर्च हो । जातक के हृदय में सदैव भय बन...

राहु की महादशा में राहु की अन्तर्दशा का फल

                                  राहु         राहु की महादशा में राहु की अन्तर्दशा का फल विष और जल के कारण रोग हो । जातक को सर्प का दशन हो । दूसरे आदमी की स्त्री से संयोग हो ।अपने किसी इष्टजन का वियोग हो । जातक कड़ी बोली बोले । और उसे दुष्टजनों के कारण रुष्ट हो                राहु की महादशा में बृहस्पति की अन्तर्दशा का फल सुख की प्राप्ति हो, देवताओं, ब्राह्मणों का पूजन हो, शरीर में कोई न रहे और सुन्दर नेत्र वाली स्त्रियों से समागम हो । विद्वत्ता के विचार-विनिमय और धार्मिक शास्त्रार्थ में समय व्यतीत हो               राहु की महादशा में शनि की अन्तर्दशा का फल अपनी स्त्री, पुत्रों और भाईयों से झगड़ा हो । जातक की पदच्युति हो और उसके नौकरों का नाश हो ।  शरीर में चोट लगे तथा बात और पित्त के कारण रोग हो ।                 राहु की महादशा में बुध की अन्तर्दशा का फल बुध...

अष्टकवर्ग की गणना

                                                                            अष्टकवर्ग चार्ट  अंक के परिणाम  14-अंक – कष्टकारी और मृत्युभय देने वाले 15- अंक - सरकार से भय रहने की संभावना बनती 16 अंक – दुर्भाग्य 17- अंक - बीमारी अथवा स्थान की हानि 18- अंक - धन हानि 19 अंक- सगे संबंधियों से लड़ाई-झगडे की संभावन 20- अंक - व्यय अधिक होगा और जातक कुकर्मों में 21- अंक - बीमारी अथवा धन की हानि 22- अंक - स्मरण व विवेक शक्ति की हानि, कमजोरी 23- अंक मानसिक चिन्ताएँ, कष्ट और हानि 24- अंक अचानक हानि अथवा अतिव्ययता से धनहानि 25- अंक- दुर्भाग्य 26- अंक - परेशानियाँ, शिथिलता, स्वभाव में अस्थिरता 27- अंक- व्यय अधिक, व्याकुलता, अस्पष्ट विचार और दुविधाजनक मस्तिष्क 28- अंक - धन लाभ लेकिन संतोषजनक नहीं 29 -अंक- व्यक्ति सम्मान पाता है. 30- अंक- यश, कीर्ति व सम्मान मिले 31 से 33 अंक प्रयास अच्छे व मान-सम्मान...